अनाशक्त रहते
आकर्षित कारण
होते प्रबल
खिंचाव
गहरा हो जाता
वर्जना के रहते
स्वाभाविक प्रवृत्ति
नहीं रहती बंधक
छलावे का दंभ
कठोर हो करता दावा
अनाशक्ति भरा
एक ओर
कर्मों की गांठ जोडता
अहंकारी जीवन
कब कर्म काल
कलुषता से चाहता जुडाव
स्वाभाविक जीवन
अस्वाभाविक
अस्तित्व आजमाता जाता
नैतिकता के निंदनीय गुर
ओर पहनता जाता
धर्म का चमकता मुखौटा
सार हीन पर आशक्ति लायक
ओर यही आधार देता
ओरो के निश्छल आस्था को
छलावा
कि टूट जाता लगाव
स्वाभाविक आचरण के
शात्विक भक्तों से
बड़े धोखे हैं साधकों से
अनाशक्त माया से
अधिक मायिक आशक्त
विश्वास देते स्वाभाविकता का
सत्य समझना बहुत मुश्किल
ओर समझे सत्य को
आत्म सात करना
आस्था मे दरार
बडा विकट हैं
भीतर का सच
आस्था
ओर नास्तिक भावों के बीच
समय गूँथा तन
सरकता जाता
अज्ञात की ओर
नहीं पाता ठौर
असलियत
कई जन्मों का धुंधला धुआँ
घेरता जाता मुझे
ओर सत्य फिर एक बार
धुंधलके में
होता जाता विलुप्त
आखिर कब मिलेगा
त्राण
शायद रागमय होने तक
ईश्वरीय संगीत की
प्रेरणा
ले पाये अवशेष तन ।
छगन लाल गर्ग ।
आकर्षित कारण
होते प्रबल
खिंचाव
गहरा हो जाता
वर्जना के रहते
स्वाभाविक प्रवृत्ति
नहीं रहती बंधक
छलावे का दंभ
कठोर हो करता दावा
अनाशक्ति भरा
एक ओर
कर्मों की गांठ जोडता
अहंकारी जीवन
कब कर्म काल
कलुषता से चाहता जुडाव
स्वाभाविक जीवन
अस्वाभाविक
अस्तित्व आजमाता जाता
नैतिकता के निंदनीय गुर
ओर पहनता जाता
धर्म का चमकता मुखौटा
सार हीन पर आशक्ति लायक
ओर यही आधार देता
ओरो के निश्छल आस्था को
छलावा
कि टूट जाता लगाव
स्वाभाविक आचरण के
शात्विक भक्तों से
बड़े धोखे हैं साधकों से
अनाशक्त माया से
अधिक मायिक आशक्त
विश्वास देते स्वाभाविकता का
सत्य समझना बहुत मुश्किल
ओर समझे सत्य को
आत्म सात करना
आस्था मे दरार
बडा विकट हैं
भीतर का सच
आस्था
ओर नास्तिक भावों के बीच
समय गूँथा तन
सरकता जाता
अज्ञात की ओर
नहीं पाता ठौर
असलियत
कई जन्मों का धुंधला धुआँ
घेरता जाता मुझे
ओर सत्य फिर एक बार
धुंधलके में
होता जाता विलुप्त
आखिर कब मिलेगा
त्राण
शायद रागमय होने तक
ईश्वरीय संगीत की
प्रेरणा
ले पाये अवशेष तन ।
छगन लाल गर्ग ।