Friday, June 10, 2016

बीत रहा वर्ष

बीत रहा वर्ष
अब नव जागरण कर ले
उषा प्राची अम्बर मे
लालिमा नूर छलका रही
नवल रस का मादक प्याला
अधर स्मित मुस्कान ढलका रही
गागर चित का स्नेह नीर ढुलका
बहती नेह निर्झर धार
नवल कुसुम के पराग कण बिखरे
अलसाये कुसुम किसलय लहराये
अंचल लतिका भरती जाती
मादक मधुमय रंगीन स्वप्न
आओ न मेरे अलसाये साथी
चहक उठ रही रागिनी कोयल
बोल लुभाती कहती जाती
नवल वर्ष मधुकर मुकुल नव रस देती
राग अविरल बहता जाय
नव वर्ष रसमय करता जाय
करूण रजनी अवसान होता
मीठा सपना अब साकार लेता
करो न शुभ मंगल हो जग का
अंतरमन सोया अब रश्मि पुंज जगा ले
बीत रहा वर्ष अब नव जागरण कर ले।
छगन लाल गर्ग।