Friday, June 3, 2016

अपना सम्मान

नहीं ले सकता मैं 
निजी मानवीय सद्भावना से 
अपना सम्मान 
आवश्यक होते मेरे ऊँचाई निमित्त 
नीतिगत कमाई के अलावा 
अपने परिश्रम से शैतानी कर
कमाई दौलत पर बने 
ऊँचे उठे मकान 
असल मे इन्हीं की बदौलत 
मेरी बढ़ती ख्याली ऊँचाई 
बहुमंजिली इमारत की वजह
अधिकांश जानते मुझे 
ओर युग का सत्य भी
नेक नियत नहीं कारण इज्जत का
कि बढ़ा सके व्यक्ति का कद 
हम ऊँचे पद से हैं रिटायर 
अतीत देता रहा ऊँचाईयां हमें 
पद की बदोलत
पर अब पद तो रहा नहीं 
ऊंचा खिताब मिले कैसे 
आलिशान आवासीय 
बंगला वजह
यही दिलाता याद अतीत ऊँचाईयां
ओर वर्तमान का वजूद बनाये रखता
मात्र यह बंगला
दोनों ही अवस्थाओ का सच
खुला खुला साफ साफ दिखता
केवल अतीत वर्तमान 
सत्य केवल एक
पहले पद जीते रहे
अब बाकी जीना रहा बंगला 
नहीं मिला समय
खुद को समझकर जीना
कहीं नहीं अपना पन
जिस पर करना पड़े फख्र
व्यक्तित्व नहीं झलकता
विगत का पद ओर 
वर्तमान का विशाल भवन
मात्र इसी कारण मेहरबानी
कि चर्चित रहते मित्रों मे
ओर इधर
निरंतर प्रगति मे 
रात दिन अग्रसर काबिल संताने 
राजनीति मे पहुँच काबलियत
ओर दिमागी कौऐ मे
अच्छी सांठगांठ आजकल 
घनी प्रतिभा उजागर करते जाते
ओर आकार बढता वर्चस्व 
बंगले शोषण करते नित्य 
व्यक्ति की प्रतिभा ओर
इन्सानियत के संवेदनशील हृदय को 
फासला बढ़ता जाता
आम ओर खास बीच 
सत्य यही प्रत्यक्ष होता जीवन
छगन लाल गर्ग