Sunday, June 12, 2016

पुनरूक्ति हैं जीवन

पुनरूक्ति हैं जीवन 
लगता आना व्यर्थ रहा
दोहराता वहीं वहीं 

जो चाहता नहीं 
पिरोये फूलों का
हार नहीं जीवन 
उजडे उपवन की स्मृति हैं 
एक अनन्त श्रृखला 
टूटते विश्वासो की
कसोट भारी
जिसे न चाहे चाहना हैं 
शायद यही राह
शाश्वतता की ओर जाती हो
शायद प्राण
अनन्त की गहनता से जुड़े ।
छगनलाल गर्ग।