मेरे प्रबुद्ध चित
असीम ज्ञान ग्रंथों के धनी
पूर्ण भराव से तने व्यक्तित्व
पात्रता की पैनी धार पर आसीन
अति सामर्थ्यवान प्रभुत्वधारी
धरातल के गणितज्ञ
अपनी हर श्वास की कीमत वसूलते
अतुलनीय निःसंदेह हो तुम
ओर ऐसे मे ऊँची स्वर्ण जात
हर तरफ की ऊँचाई
केवल तुम्हारे लिए
युग का संचालन तुम्हारी मर्जी पर
केवल इतना सा निवेदन
धरातल की यथार्थ चेतना में
पनपते सरल शात्विक जीवन में
प्रबुद्धता भरा तुम्हारी श्रेष्ठता का बीज
मत डालो
जटिल तुम बनते रहो
सरल निखिल जग मे उच्चता का
विष मत घोलो
प्रदूषित तुम्हारा जीवन रखो हमेशा
धरातल से दूर ।
छगन लाल गर्ग ।