Monday, March 28, 2016

अकारण जल्दी ।


अकारण मत करना
जल्दी
हमारी तरह
तुम भी
जीवन से सबकुछ
पा लेने की आशा
मानव रहते अति मुश्किल
अतिक्रमण हो
मनुष्यता का तभी संभव
यह ज्यादती होगी शायद
अगर हमसे हो सामान्य
न हो तुम हमारी तरह
आदमी
स्वाभिमान सत्य सदाचार
अंगीकृत हुए
तब हम हो जाते झूठे साबित
बहुत शीघ्र
ऊँचाई उठने की काबलियत
तुम्हारी
प्रसिद्धि डंका बजना ही चाहता
तुम्हारे सिर
कारण हैं तुम्हारे पास
आत्मीयता की जगह
चालाकी फरेब हथियारों से
सांसारिक संघर्ष जीतकर
निश्चित ही
सच्चाई भरी आदमियों की दुनिया
पार करके तुम
पहुँच चुके पशुओं के जंगल
ओर यहाँ
कोई ओर ताकतवर बन कर
मिटाये हस्ती
करनी होती है अतिसार की
जल्दी ।
छगन लाल गर्ग ।