Monday, March 21, 2016

अंधविश्वास पर नहीं ।

अंधविश्वास नहीं
व्यवहारिक रहना जरूरत
समय की
परंपरा के निर्जीव संस्कार
माँजने जरूरी
वृहतर संबंध वस्तुओं से जुड़े
संवेदना शून्य संबंध
अब हो रहे मुर्दे
अब नहीं आता फर्क करना
दीये ओर सूर्य रोशनी बीच
बेबूझ हुआ जाता
वस्तुओ के स्वार्थ भरा
जिन्दगी का गणित
समस्त दर्शन विचार नहीं
केवल भ्रमित पंथ की
अंधी उतेजना
मनुष्य हुआ जाये कैसे
अंधविश्वास का शिकंजा
अति विस्तृत
कास आँखें सत्य देखे
फिर उन्मुख हो भावी
सीखे मानव मानव बन
समर्पित होना
सत्य पर करे भरोसा
अंधविश्वास पर नहीं ।
छगन लाल गर्ग।