मत रोको नहीं रूकती
जगत जो भरी महक
नाना रूपिणी श्रृंगारमयी छवि
आशक्त मधु मृदुल यौवन
उफान घना आनंद लिए
मत रोको नहीं रूकती
रोनक खुशबू ताजी ताजी
स्वप्न शील उन्माद घीरी बिम्ब
मधुरता सागर लहरायें
करो प्रेम पूर्णता पाओ
जी भर लो सौन्दर्य रस मादक मदभरा
हौले हौले अधर पान करो तुम
यह रूप मदिरा उसी का
नवरूप बनाया
रूक नहीं जाय प्रेम हमारा
बढे फैले जग मे छा जायें
हिलोरें आनंद बन उर्ध्व उछले
उस पार प्रभु शरणों को धो लें
लहरें रागिनी अनंत घेरे
प्रेम वेग नद मानव जीवन
रोको मत आने दो ।
छगन लाल गर्ग।
जगत जो भरी महक
नाना रूपिणी श्रृंगारमयी छवि
आशक्त मधु मृदुल यौवन
उफान घना आनंद लिए
मत रोको नहीं रूकती
रोनक खुशबू ताजी ताजी
स्वप्न शील उन्माद घीरी बिम्ब
मधुरता सागर लहरायें
करो प्रेम पूर्णता पाओ
जी भर लो सौन्दर्य रस मादक मदभरा
हौले हौले अधर पान करो तुम
यह रूप मदिरा उसी का
नवरूप बनाया
रूक नहीं जाय प्रेम हमारा
बढे फैले जग मे छा जायें
हिलोरें आनंद बन उर्ध्व उछले
उस पार प्रभु शरणों को धो लें
लहरें रागिनी अनंत घेरे
प्रेम वेग नद मानव जीवन
रोको मत आने दो ।
छगन लाल गर्ग।