अतिशय गहन
सत्य मार्मिक स्नेह
जब हो जाता
अति विरल
बन कर नमनीय
द्रव्य सा
प्रवाहित होता रहता
प्राणों का
मीठा राग बनकर
तब कहीं
प्रतिफलन पाते
स्नेहिल रिश्ते
मर्यादा ओर अहं से
गिरकर
बहने लगते जीवन के
समरसता भरे धरातल
नहीं होता संदेह
रिश्तों की पृष्ठभूमि में
समय परिवर्तन की
पवन
कभी ठंडी तो कभी गरम
चौंट करती जाती
हर स्थूल पर
देह बीच बंधे
राग संबंध भी
होते जाते प्रभावित
ओर
भरोसे के महीन सूत्र
हिलते थरथराते
पवन के धक्कों से
अंतस्थल विश्वास का
खूब गहरे मे
कण भर रहा
बीज संदेह
मिटा कहां
दबा रहा अब तक
विश्वास रहा
पर केवल शब्दों का
भीतर का
असली संदेह बीज
संसार की उष्मा से
वक्त की करवट तले
लेता
फिर आकार अनजान
जिसमें संतुलन की
समझ से
जीवन बन जाता भार
केवल रागात्मक ही
प्राण परख लेते
नाजुक जीवन का
अहसास ओर
मधुरतम से
यही मिलकर
प्राण कर लेता
परमेश्वर का श्रृंगार
अद्भुत हैं जीवन राज ।
छगन लाल गर्ग ।
सत्य मार्मिक स्नेह
जब हो जाता
अति विरल
बन कर नमनीय
द्रव्य सा
प्रवाहित होता रहता
प्राणों का
मीठा राग बनकर
तब कहीं
प्रतिफलन पाते
स्नेहिल रिश्ते
मर्यादा ओर अहं से
गिरकर
बहने लगते जीवन के
समरसता भरे धरातल
नहीं होता संदेह
रिश्तों की पृष्ठभूमि में
समय परिवर्तन की
पवन
कभी ठंडी तो कभी गरम
चौंट करती जाती
हर स्थूल पर
देह बीच बंधे
राग संबंध भी
होते जाते प्रभावित
ओर
भरोसे के महीन सूत्र
हिलते थरथराते
पवन के धक्कों से
अंतस्थल विश्वास का
खूब गहरे मे
कण भर रहा
बीज संदेह
मिटा कहां
दबा रहा अब तक
विश्वास रहा
पर केवल शब्दों का
भीतर का
असली संदेह बीज
संसार की उष्मा से
वक्त की करवट तले
लेता
फिर आकार अनजान
जिसमें संतुलन की
समझ से
जीवन बन जाता भार
केवल रागात्मक ही
प्राण परख लेते
नाजुक जीवन का
अहसास ओर
मधुरतम से
यही मिलकर
प्राण कर लेता
परमेश्वर का श्रृंगार
अद्भुत हैं जीवन राज ।
छगन लाल गर्ग ।