उदास पल
देते जाते चिंतन की उमस
खंगालने लगता जीवन
जीया अन जीया
लम्हों के बिम्ब फिर फिर
घेरते जाते
श्वास रफ्तार की सच्चाई
आवेश का कोहरा नही रखता आँखे
सौंदर्य पावनता बनती धून्ध सी
फिसलती सच्चाई हर पल बेहोशी में
ओर चेतन गहरे गर्त तले
खोता जाता स्वरूप स्वगुण स्वगत
ओर यह कालिमा
छोड जाती दाग गहरे
फिर नही धूलते किसी साबून
वह एक पल बदनुमा दाग देकर
छीन लेता जीवन
बिना होश का मानव जीवन
जीवन नही
बन जाता अभिशाप
जिसे जीवन शैली का सत्य
कसमकस भरी कसक देते रहते
उदास पल ।
छगन लाल गर्ग ।
देते जाते चिंतन की उमस
खंगालने लगता जीवन
जीया अन जीया
लम्हों के बिम्ब फिर फिर
घेरते जाते
श्वास रफ्तार की सच्चाई
आवेश का कोहरा नही रखता आँखे
सौंदर्य पावनता बनती धून्ध सी
फिसलती सच्चाई हर पल बेहोशी में
ओर चेतन गहरे गर्त तले
खोता जाता स्वरूप स्वगुण स्वगत
ओर यह कालिमा
छोड जाती दाग गहरे
फिर नही धूलते किसी साबून
वह एक पल बदनुमा दाग देकर
छीन लेता जीवन
बिना होश का मानव जीवन
जीवन नही
बन जाता अभिशाप
जिसे जीवन शैली का सत्य
कसमकस भरी कसक देते रहते
उदास पल ।
छगन लाल गर्ग ।