Thursday, March 31, 2016

उलझे रास्ते ।


उलझ गये रास्ते
एक दूसरे से
व्यक्तिगति रोकने नहीं
अपनी सार्थकता सिद्धि हेतु
ओर घने दावों का सच
नहीं आता समझ
अंधेरा घीरा माहोल
प्रकाश बिना
चमकीला उजाला सत्य का नहीं
चकाचौंध भरा
केवल अस्मिता निमित्त पाखंड
मायामय भ्रामक भूल भूलैया का पुञ्ज
ओर यही कारण
असलियत का प्रकाश नहीं देता रोशनी
जीवन की राहों को
बिना रोशनी की राहें
पाखंड प्रकाश से आलोकित करती
दिशा हीन मार्गदर्शन
ओर राहें नहीं देती मंजिल
असमर्थ बना राही भ्रमित राहों
चलने बाध्य
असलियत तलाश अन्वेषण राहें
स्व रोशन मर्मज्ञ व्यक्ति का स्वप्न
होने दो पूरा
चकाचौंध के पाखंड को त्यागना
हमारी जिम्मेदारी ।
छगन लाल गर्ग ।