बहुत जरूरी हो चुका
जिन्दगी जीने का
रखना हिसाब किताब
नहीं रहा भरोसा
खुद पर आदतों को लेकर
पता नहीं कब
रहना पडे विवश जरूरतों से
ओर भ्रमित करते पोस्टर विज्ञापन
कर ले कब्जा कमाई पर
उधर नूतन सौन्दर्य देते
अतिरिक्त जीवन जीते
टी वी सीरियल के पात्र
भार देते गृहस्थी पर
विश्वास ओर व्यवहार पर
करने लगे आघात
कि नहीं आता सत्य कहते
या कि करते
डगमगाने लगते आस्था के स्तंभ
डर के छायों मे
गुजरती जिन्दगी कब ढह जाये
आधुनिकता के प्रभाव बीच
नहीं कह सकता
अच्छा रहे हर व्यक्ति का श्रेष्ठ रहे
गहरी सूझ बूझ ओर
समय की हर करवट पर
पहेलु पलटने का सीखे
गहरापन ।
छगन लाल गर्ग ।
जिन्दगी जीने का
रखना हिसाब किताब
नहीं रहा भरोसा
खुद पर आदतों को लेकर
पता नहीं कब
रहना पडे विवश जरूरतों से
ओर भ्रमित करते पोस्टर विज्ञापन
कर ले कब्जा कमाई पर
उधर नूतन सौन्दर्य देते
अतिरिक्त जीवन जीते
टी वी सीरियल के पात्र
भार देते गृहस्थी पर
विश्वास ओर व्यवहार पर
करने लगे आघात
कि नहीं आता सत्य कहते
या कि करते
डगमगाने लगते आस्था के स्तंभ
डर के छायों मे
गुजरती जिन्दगी कब ढह जाये
आधुनिकता के प्रभाव बीच
नहीं कह सकता
अच्छा रहे हर व्यक्ति का श्रेष्ठ रहे
गहरी सूझ बूझ ओर
समय की हर करवट पर
पहेलु पलटने का सीखे
गहरापन ।
छगन लाल गर्ग ।