Wednesday, March 23, 2016

करो कुछ ।


करो ना कुछ
संसार बने हमारा
मत हो जाओ शिथिल
थकना छोड़ो ना
शरीर का काम मत लो
मन से
कि हर बार
विश्रान्ति चाह घेरे तुम्हें
भटकन चलती रहे
निशान कहीं जमेंगे ही
पदचाप अधिक धरातल नहीं
सीमित सूनेपन जमती
तलाश सूनेपन की पर
सक्रियता संसार बने हमारा
यही युग सत्य
फर्क करो ना
भीतर बाहर परिपक्व बनो
यश का दीया
 सीमित से जन्म लेता
फिर घेरता विशाल
कर्ता बनना होगा मन से
तभी समर्थ होंगे
संसार करेगा नमन तभी
कर्ममय प्रण
जीवन नहीं संसार देता
यही शाश्वत सत्य ।
छगन लाल गर्ग ।