Wednesday, March 2, 2016

वैचारिक हिंसा ।

अधिक प्रबुद्धता
दे जाती
वैचारिक संग्रहण
ओर बनते जाते
विभिन्न
वादों के समुदाय
जो अपने संग्रहित
विचारों का
करते हैं
प्रचार प्रसार
ओर
श्रेष्ठता का दावा
प्रबुद्धता
फिर लेती जाती
कट्टरता का आवरण
अपनी
अहंकार तुष्टि निमित्त
जब कोई
तार्किक विचार
बनता जाता
किसी समुदाय
या कि मेरा
तभी वह हो जाता
सत्य से च्युत
भी विमुख भी
प्रकट नहीं हो पाता
भीतर का अहं
आरोपित हो जाता
मेरा सत्य
आज हर प्रबल
शक्ति
सता से युक्त समुदाय
सत्य से विवाद नहीं
सूक्ष्म में
सता व शक्ति की सत्यता
का होना ही
विचारों की सत्यता
असली सत्य
आधार भूत
 सच्चाई हर अंश मे
अपनी सता रखती
सत्य को रौदते
सत्यता साबित
करते विवादित
घिरती जाती
आज की मानवता ।
छगन लाल गर्ग ।