विरक्त नहीं
रिक्त हूँ मैं
असीम
दीनता से ओतप्रोत
विरक्त सा जीवन
नहीं कुछ सार तत्व
कि इतराऊँ खुद पर
नहीं रखता पद कोई
कि अकड अहंकार हो
न ज्ञान का प्रकाश
कि ज्योति बिखरे
ओर रोशन कर सकू
अंधेरों की दुनिया
ओर नहीं
धन दौलत की खनक
कि हृदय हीन इमारतों का
बन सकूँ स्वामी
कुछ भी तो नहीं मेरे पास
बिल्कुल शून्य रिक्त
केवल तेरे नाम
सरकता तेरी ओर
यह शून्य जीवन ।
छगन लाल गर्ग ।
रिक्त हूँ मैं
असीम
दीनता से ओतप्रोत
विरक्त सा जीवन
नहीं कुछ सार तत्व
कि इतराऊँ खुद पर
नहीं रखता पद कोई
कि अकड अहंकार हो
न ज्ञान का प्रकाश
कि ज्योति बिखरे
ओर रोशन कर सकू
अंधेरों की दुनिया
ओर नहीं
धन दौलत की खनक
कि हृदय हीन इमारतों का
बन सकूँ स्वामी
कुछ भी तो नहीं मेरे पास
बिल्कुल शून्य रिक्त
केवल तेरे नाम
सरकता तेरी ओर
यह शून्य जीवन ।
छगन लाल गर्ग ।