Saturday, March 19, 2016

निर्मम स्वार्थ।

तनाव हैं यह
अधिक ऊर्जा का व्यय
अपने परिवार पोषण निमित्त
चाह से अनुकूल पैदावार
परम सत्ता का विशिष्ट अनुग्रह
संतोष छाया नैसर्गिक आनंद क्षण
एक कृषक के जीवन का
पर कुछेक पलों के बाद
उमडने लगते विपदाओं के बादल
साहूकार का बकाया
भाइयों का खाया अन्न चुकता करना
ओर इधर बैंक का नोटीस
खाद बीज का हिसाब ब्याज सहित
सारा उत्साह धूमिल हुआ जाता
काले घुमडते बादलों की तरह
ओर क्रोध भरी जलती आँखें
ईर्ष्या की
हिस्सेदारी भाइयों में
अपनी कमाई अधिक लगते ही
कहना शुरू
हमारा पीछला हिसाब होने बाद
कमाया अनाज उठने देंगे
पहले हिसाब फिर अनाज तुम्हारे
उदास के क्षण
मेहनती कमाई साथ लाई
देखता हूँ वसूली का
निर्मम स्वार्थ ।
छगन लाल गर्ग।