नहीं रखती महत्व
परीक्षा चौटिल व्यक्तित्व
दौडती धारा में प्रवाहित
उसका तैराकी का
अनुभव दे जाता काम
कठोरतम जड जीता
संवेदना हीन जीवन
हर परीक्षा उसकी होती पक्षकार
वह स्वयं बनता सूत्रधार
आस्थामय व्यक्ति जीवन
परीक्षा का असली संभागी
शायद वहीं बेठता अदृश्य
की परीक्षा में
होती हैं परीक्षाऐं पर
पात्र वहीं व्यक्ति
पहले होना होता काबिल
हर एक की नहीं परीक्षा
पर जटिलतम जीवन का
अंश होती परीक्षाऐं
मूल्यांकित होता अस्तित्व
ज्ञान ओर चेतना का
तर्क ओर क्षमता का
रूपक बनता सत्य का
केवल निष्पक्षता
धारण कर लेती मौन
ओर झकडता जाता
चेतन व्यापक
क्षुब्धता घेरती व्यक्तित्व
असलीपन की पहचान पाता
व्यक्तित्व
अन्तोत्वगत्वा परीक्षाऐं ईश्वरीय
आकलन कृपा का
पहचान पाना सत्य ही
सच्ची सफलता हैं जीवात्मा की
बिना शिकायत ।
छगन लाल गर्ग ।