Wednesday, March 30, 2016

रूदन।


रूदन मत रोको
बहने दो
अविरल अतिशय वेग
आँसुओं का
विवेक ओर रूदन
विपरीत दशा भावों की
नहीं देता काम
अतिशय आवेग दुख प्रवाह
मत कहो मूढता यह
बहने दो आँसू
भीतर हृदय जमा कालापन
कूडा दुर्विचारो का
बहने दो आँसू बनकर
नव बोध होने दो
ताजेपन का
शुद्धता का अहसास स्नान सा
निर्मल चित हो जाने दो
ऑसू मेरे
बहने से रीतता सूना हृदय
प्रस्फूटित करना चाहता
नव ऊर्जा लिए
जीवन संजीवनी नव रस धार
रूदन की बेला
नव सुख प्रस्फूटन की सूचना
भावी संकेत सुख मात्र ।
छगन लाल गर्ग ।