अजीब बोध संजोये
चल पडा जीवन यात्रा
सिद्धांत स्वीकार लिए
विश्लेषण बिना
भीतर बहुत पाता रिक्तता
मेरा हर कृत्य
रहता समझदारी का प्रदर्शन
पर जानता हूँ मैं
सब करतूत मेरी झूठ भरी
नहीं तनिक भी ठावस
सत्य भरी
ओर सच का अहसास
करता भीतर
पाता हूँ सार तत्व
हर बात विचार
भावना प्रेम प्रार्थना सब कुछ
मात्र मेरी समझदारी
प्रदर्शन
भीतर भारी रिक्तता
नहीं हूँ सछ मैं
एक पूलिन्दा भर झूठ का
असलीपन मेरा
अहसास मुझे ।
छगन लाल गर्ग ।
चल पडा जीवन यात्रा
सिद्धांत स्वीकार लिए
विश्लेषण बिना
भीतर बहुत पाता रिक्तता
मेरा हर कृत्य
रहता समझदारी का प्रदर्शन
पर जानता हूँ मैं
सब करतूत मेरी झूठ भरी
नहीं तनिक भी ठावस
सत्य भरी
ओर सच का अहसास
करता भीतर
पाता हूँ सार तत्व
हर बात विचार
भावना प्रेम प्रार्थना सब कुछ
मात्र मेरी समझदारी
प्रदर्शन
भीतर भारी रिक्तता
नहीं हूँ सछ मैं
एक पूलिन्दा भर झूठ का
असलीपन मेरा
अहसास मुझे ।
छगन लाल गर्ग ।