अब हो चुके भेद
नहीं रहा सत्य अटल
अंतर आया हूई प्रगति
अब झूठ के कंधों पर
शोभित होता सत्य
बिना झूठ का सत्य
अस्तित्व खो चुका
नहीं चल सकता प्रगतिशील युग
ओर यदि भूल वस
लिया सहारा सत्य का
रूक जाती सभ्यता ओर संस्कृति
ओर मानवता तोडने लगती
अपना जीवन आधार
अगर खतरा सत्य का रहा
मर जायेंगे रोशन सितारे
नहीं रहेगी चिकनाई जीवन की
रूखा सत्य
मानव का विध्वंस होगा
रहने दो इसे
झूठ ही आज का सत्य
कहने की शैली
निखार निमित्त खुले प्रशिक्षण केन्द्र
ताकि मानव कर सके
प्रगति की असीम ऊंचाई तय ।
छगन लाल गर्ग ।
नहीं रहा सत्य अटल
अंतर आया हूई प्रगति
अब झूठ के कंधों पर
शोभित होता सत्य
बिना झूठ का सत्य
अस्तित्व खो चुका
नहीं चल सकता प्रगतिशील युग
ओर यदि भूल वस
लिया सहारा सत्य का
रूक जाती सभ्यता ओर संस्कृति
ओर मानवता तोडने लगती
अपना जीवन आधार
अगर खतरा सत्य का रहा
मर जायेंगे रोशन सितारे
नहीं रहेगी चिकनाई जीवन की
रूखा सत्य
मानव का विध्वंस होगा
रहने दो इसे
झूठ ही आज का सत्य
कहने की शैली
निखार निमित्त खुले प्रशिक्षण केन्द्र
ताकि मानव कर सके
प्रगति की असीम ऊंचाई तय ।
छगन लाल गर्ग ।