Friday, March 25, 2016

कामना।


हम सब हैं काम
इच्छाओं का विस्तार
यह जगत
सब व्यस्त अपनी गरज
हो सके
कामनाओं की आपूर्ति
रात दिन यही कसक
लगे हैं अपने कारण
कुछ बोध हो
अन्य भी
समझे तोले हमें
ओर हमारे में
कुछ अलग दिखे
प्रभावित करने लायक
वजन पाऊं मैं
मेरा समस्त विस्तार
आये समझ लोगों के
ओर महता का
अंकन हो
नहीं आपत्ति
विनिष्ट होते हो
ओरों के सपने
होने दो
या कि
राहों के काँटे
हो चुभने लायक
जलाना होगा उन्हें
मानवता का नाम देकर
हटे स्वतः अच्छा
केवल अवसर की
चुनौती दो उन्हें
हमे बढना आता
बाहर की ओर
बढता काफिला
अभी सूर्योदय काल
आओ सभी समझदार
प्रगति के पहियों
एक नया संसार बना ले
काम भरा कामना निमित्त ।
छगन लाल गर्ग ।