अस्तित्व मेरे
ना तुम बहुत ऊँचे
सर्वोच्च
कि गहन अहंकार से भरा
समझ लूँ स्वयं
दिव्य अलौकिक प्रभुत्व स्वामी
ना तुम इतना निम्न
इतना लघु कि न दिखूँ
खुली आँखों से भी
बदतर हो जाऊं
मानवता की तल से बहुत नीचा
ना गलतफहमी भर लेना
तुलनात्मक जीवन जीने की
ना निन्दा का भाव
ना ही स्वयं के यश गुणगान
आकांक्षा से भरना मुझे
मेरे अस्तित्व
चाहता मैं असलियत भरा
सहज सीधा जीवन ।
छगन लाल गर्ग ।