Sunday, March 20, 2016

मनुजता ।

अंधकार रोकता कदम
ओर नहीं व्याप्त अकेलापन
बहुत साथी अंधेरों के
अस्तित्व लिए सहयोग आँकाक्षी
अब निर्भर पूर्ण मन हमारे
कि रूकना अंधेरो संग
साथी संग
निष्क्रिय बेतरावट बेहोश जिन्दगी
हमारे हाथ बिल्कुल
जीने की स्वच्छन्दता हमारी
पर दिखता जाता
अंधेरों को चीरता रोशनी का कतरा
चाँद तारें झिलमिल झिलमिल
एक अचेतन ध्वनि
गाती संगीत
ले चल मेरे प्रभु रोशन जहां मुझे
सुनते हो बडा कठिन
पर अटल सत्य
मानव का सत्य मनुजता
असलियत केवल रोशनी ।
छगन लाल गर्ग।