घना जी लेने के बाद
अब कहता
असत्य हूँ मैं
अब यह लगता ऐसा
कि मेरा अपना
बहुत कुछ सब कुछ
केवल झूठ
मेरी भी ओर आपकी
सुनी सुनायी परी कथा
वेदों ओर पुराणों के
अनुभूत सत्य
असमझे रहे नहीं कर पाया
व्याख्या समयानुकूल
शब्द समस्त देते प्रतिक्रिया
युग साक्षेप
ओर जमाने का यथार्थ
देता अनगिनत भावों का गुम्फन
विश्लेषण मे सारे भाव
केवल असत्य ओर भ्रमित
मेरा प्रेम
अतिशय पावन शब्दों से मंजा
स्वार्थ की पृष्ठभूमि पर टीका
आजतक
महसूस करता समय के साथ
चमकीला मुल्लमा उतरा हुआ
नीरस ओर उबाऊ
प्यार मेरा
सचमुच का झूठा निकला
हर ओर से
मेरी मंदिर की प्रार्थना भी
केवल झूठ
तल्लीन श्रृद्धा में डूबते भी
भटक जाता मन
सच्ची प्रार्थना से
हर क्रिया मेरी बन चुकी
दिखावा मात्र
नही जानता सत्य हैं कहां
विभ्रान्ति ही अंत बना
जीवन मेरा ।
छगन लाल गर्ग।
अब कहता
असत्य हूँ मैं
अब यह लगता ऐसा
कि मेरा अपना
बहुत कुछ सब कुछ
केवल झूठ
मेरी भी ओर आपकी
सुनी सुनायी परी कथा
वेदों ओर पुराणों के
अनुभूत सत्य
असमझे रहे नहीं कर पाया
व्याख्या समयानुकूल
शब्द समस्त देते प्रतिक्रिया
युग साक्षेप
ओर जमाने का यथार्थ
देता अनगिनत भावों का गुम्फन
विश्लेषण मे सारे भाव
केवल असत्य ओर भ्रमित
मेरा प्रेम
अतिशय पावन शब्दों से मंजा
स्वार्थ की पृष्ठभूमि पर टीका
आजतक
महसूस करता समय के साथ
चमकीला मुल्लमा उतरा हुआ
नीरस ओर उबाऊ
प्यार मेरा
सचमुच का झूठा निकला
हर ओर से
मेरी मंदिर की प्रार्थना भी
केवल झूठ
तल्लीन श्रृद्धा में डूबते भी
भटक जाता मन
सच्ची प्रार्थना से
हर क्रिया मेरी बन चुकी
दिखावा मात्र
नही जानता सत्य हैं कहां
विभ्रान्ति ही अंत बना
जीवन मेरा ।
छगन लाल गर्ग।