Monday, May 30, 2016

मत कहना
अनुभूति सत्य
अच्छा नही रहेगा
श्रेष्ठता तुम्हारी
बन सकती आफत जीने की
निर्लिप्तता बहुत बडा दोष
इस युग का
अस्तित्व हीन तुम
बिना पक्ष संगठन
पहचान नही हो सकेगी
अगर बिन पूछे भूल कर
देते सुझाव
घसीटते रहोगे पंगु बन
माना कि तुम विद्या सागर
पर मत कहना
आजकल हर व्यक्ति
कच्ची उम्र मे पा जाता
परिपक्वता सामयिक
नही देखा तुमने
उच्च शिक्षा शास्त्री
वक्ता प्रवक्ता स्कूल कालेज के
प्रगाढ प्रतिभा के धनी
कैसे चाटते शरण
हमारे परिपक्व तपे तपाये नेता
तपस्वी से अधिक तपने के बाद
पायी हुनर
क्या मतलब तुम्हारा
डिग्री से आती समझ
असल में वेरागी सता के
साक्षर पर जिन्दगी के पारखी
राज नेता भई वाह
स्वतः नमन हुआ जाता तन
उनकी वाकपटुता के बल
भीड का
जोखिम भरा नेतृत्व
देश उनका भीड उनकी
विपरीत वजूद धारी का
चलता निरंतर
दांवपेंच
कैसे कर जाते कुंठित अपाहिज
बडा घमासान संसार मतलब का
चुप रहो तुम मत कहो
जीवन का मर्म
नही चाहिए किसी को भी
वक्ता नेता या विचारक को
कोई मानवीय विचारधारा
सब धुन के पक्के
देश के युग निर्माण मे लगे
देखो तुम सठिया गये
उम्र तुम्हारी नही रही
सृजन की
मार्गदर्शन चाहा किसने
हम जानते सब
रश्मिरथी हम नवीन चेतना वीर
रोको मत कहो मत
ठोकर खाकर गिर ना जाओ
बीच बोले तो
सुनो अच्छा नही रहेगा ।
छगन लाल गर्ग ।