मत कहना
अनुभूति सत्य
अच्छा नही रहेगा
श्रेष्ठता तुम्हारी
बन सकती आफत जीने की
निर्लिप्तता बहुत बडा दोष
इस युग का
अस्तित्व हीन तुम
बिना पक्ष संगठन
पहचान नही हो सकेगी
अगर बिन पूछे भूल कर
देते सुझाव
घसीटते रहोगे पंगु बन
माना कि तुम विद्या सागर
पर मत कहना
आजकल हर व्यक्ति
कच्ची उम्र मे पा जाता
परिपक्वता सामयिक
नही देखा तुमने
उच्च शिक्षा शास्त्री
वक्ता प्रवक्ता स्कूल कालेज के
प्रगाढ प्रतिभा के धनी
कैसे चाटते शरण
हमारे परिपक्व तपे तपाये नेता
तपस्वी से अधिक तपने के बाद
पायी हुनर
क्या मतलब तुम्हारा
डिग्री से आती समझ
असल में वेरागी सता के
साक्षर पर जिन्दगी के पारखी
राज नेता भई वाह
स्वतः नमन हुआ जाता तन
उनकी वाकपटुता के बल
भीड का
जोखिम भरा नेतृत्व
देश उनका भीड उनकी
विपरीत वजूद धारी का
चलता निरंतर
दांवपेंच
कैसे कर जाते कुंठित अपाहिज
बडा घमासान संसार मतलब का
चुप रहो तुम मत कहो
जीवन का मर्म
नही चाहिए किसी को भी
वक्ता नेता या विचारक को
कोई मानवीय विचारधारा
सब धुन के पक्के
देश के युग निर्माण मे लगे
देखो तुम सठिया गये
उम्र तुम्हारी नही रही
सृजन की
मार्गदर्शन चाहा किसने
हम जानते सब
रश्मिरथी हम नवीन चेतना वीर
रोको मत कहो मत
ठोकर खाकर गिर ना जाओ
बीच बोले तो
सुनो अच्छा नही रहेगा ।
छगन लाल गर्ग ।
अनुभूति सत्य
अच्छा नही रहेगा
श्रेष्ठता तुम्हारी
बन सकती आफत जीने की
निर्लिप्तता बहुत बडा दोष
इस युग का
अस्तित्व हीन तुम
बिना पक्ष संगठन
पहचान नही हो सकेगी
अगर बिन पूछे भूल कर
देते सुझाव
घसीटते रहोगे पंगु बन
माना कि तुम विद्या सागर
पर मत कहना
आजकल हर व्यक्ति
कच्ची उम्र मे पा जाता
परिपक्वता सामयिक
नही देखा तुमने
उच्च शिक्षा शास्त्री
वक्ता प्रवक्ता स्कूल कालेज के
प्रगाढ प्रतिभा के धनी
कैसे चाटते शरण
हमारे परिपक्व तपे तपाये नेता
तपस्वी से अधिक तपने के बाद
पायी हुनर
क्या मतलब तुम्हारा
डिग्री से आती समझ
असल में वेरागी सता के
साक्षर पर जिन्दगी के पारखी
राज नेता भई वाह
स्वतः नमन हुआ जाता तन
उनकी वाकपटुता के बल
भीड का
जोखिम भरा नेतृत्व
देश उनका भीड उनकी
विपरीत वजूद धारी का
चलता निरंतर
दांवपेंच
कैसे कर जाते कुंठित अपाहिज
बडा घमासान संसार मतलब का
चुप रहो तुम मत कहो
जीवन का मर्म
नही चाहिए किसी को भी
वक्ता नेता या विचारक को
कोई मानवीय विचारधारा
सब धुन के पक्के
देश के युग निर्माण मे लगे
देखो तुम सठिया गये
उम्र तुम्हारी नही रही
सृजन की
मार्गदर्शन चाहा किसने
हम जानते सब
रश्मिरथी हम नवीन चेतना वीर
रोको मत कहो मत
ठोकर खाकर गिर ना जाओ
बीच बोले तो
सुनो अच्छा नही रहेगा ।
छगन लाल गर्ग ।