दौडना आता पर पैरों मे शक्ति चाहिए
हकीकत जानते पर फिसलना चाहिए
डगर मुश्किल पर आगे बढना चाहिए
हैं रात पर रोशन दीया जलना चाहिए ।
अकेले क्यों चलो साथी को ढूँढ लो
कई साथ चाहें अकेलेपन से त्राण लो
जीवन मात्र तुम्हारा नहीं उनका भी लो
मिले रस दोनों को आनंद पूरा जी लो ।
तुम जानते हो तुम्हारे कार्य का परिणाम
अहसास होता पूर्व मे अच्छे बुरे अंजाम
साहस पुरुषार्थ भीतर करें गति विलोम
झेलते दुख भार संघर्ष बने विवशता मर्म।
सोते रहना कहते हैं सुख का इजहार हैं
मन कहे तन सुख का आभास ले रहा हैं
वहीं तन क्रिया शिथिल हुआ निक्कमा हैं
नित नयी बीमारी से खुद घिर जाता हैं ।
सुनोगे कुछ कहता हूँ
दिल दुख तले पाता हूँ
रोशनी कतरे ढूँढता हूँ
सहारे खोज ही जीता हूँ ।
उम्र अभी बाकी हैं
उम्मीदें तो काफी हैं
तलाश रास्ते की हैं
मिले तभी शांति हैं ।
बहुत कम घड़ी देखता हूँ
जरूरत रही तो सुनता हूँ
क्रिया प्रतिक्रिया देखता हूँ
जवाबदेही नहीं पाता हूँ ।
मान सम्मान का सिलसिला पुराना हैं
सिलसिला चलाने का भी फिलसफा हैं
कुछ काम बनते कुछ नकाराओं का हैं
कुछ भी फायदा सत छोड सबका हैं ।
कम से कम हरेक को सम्मान देते रहो
अपने पराये सभी आपसे संतुष्ट हो
सम्मान देते तो क्या जाता छोटे बने हो
छोटेपन मे बडेपन अंकुर जानते हो।
विरानता ही विराम का हेतु हैं
निष्क्रियता ही जडता सार हैं
हलचल गति की पहचान हैं
विवेक जीवन का सारा मर्म हैं ।
फल मिले ना मिले काम तो करो
राह मिले ना मिले चला तो करो
सहारा मिले ना मिले स्नेह तो करो
भरोसा हो न हो मानवता कर्म करो ।
आते