अगर मैं कहता
स्वयं को मूढ ठीक रहेगा
सही होगा मूल्यांकन
केवल मेरा
मत ले अन्यथा कोई ओर
चाहे अनचाहे
भूल जाता हूँ मैं समस्त
योजनाओं को
ऊलजलूल नही क्रियायें
मेरे सुख निमित्त
गूँथी मैंने
अरमानो के सतरंगी रैशम के धागों से
अच्छे सुंदर अनुभवों का निचोड
सभ्रांत पुरूषों का
ओर मेरा अपना नमकीन अनुभव भी
सुख समृद्धि निमित्त
जोडा ओर पाया ऊर्जा स्फीत
स्वयं को
पर यह क्या आया सुख चेतन कहां
आते ही संग मेरे
सुख के तमाम हिस्से होते रहे ढीले
ओर मै नही कर पाता स्पर्श
या कि आलिंगन सुख
सच कहूँ
सोचा मिलते ही मेरा सुख
हो जाता बासी
विगत अरमानो के साक्षात्कार से
नही घटित होती
कोई क्रांति कि बन सके इतिहास
बस अरमानो का एक गर्त
जिसमे डूबता
निकलते ही फिर करता तैयार
नया गर्त
निरंतर का क्रम बना जीवन
डूब जाना
सुख कामना हित
अतृप्ति के नये गर्त की जमीन
तलाशते व्यतीत होता
मेरा मूढ जीवन ।
छगन लाल गर्ग ।
स्वयं को मूढ ठीक रहेगा
सही होगा मूल्यांकन
केवल मेरा
मत ले अन्यथा कोई ओर
चाहे अनचाहे
भूल जाता हूँ मैं समस्त
योजनाओं को
ऊलजलूल नही क्रियायें
मेरे सुख निमित्त
गूँथी मैंने
अरमानो के सतरंगी रैशम के धागों से
अच्छे सुंदर अनुभवों का निचोड
सभ्रांत पुरूषों का
ओर मेरा अपना नमकीन अनुभव भी
सुख समृद्धि निमित्त
जोडा ओर पाया ऊर्जा स्फीत
स्वयं को
पर यह क्या आया सुख चेतन कहां
आते ही संग मेरे
सुख के तमाम हिस्से होते रहे ढीले
ओर मै नही कर पाता स्पर्श
या कि आलिंगन सुख
सच कहूँ
सोचा मिलते ही मेरा सुख
हो जाता बासी
विगत अरमानो के साक्षात्कार से
नही घटित होती
कोई क्रांति कि बन सके इतिहास
बस अरमानो का एक गर्त
जिसमे डूबता
निकलते ही फिर करता तैयार
नया गर्त
निरंतर का क्रम बना जीवन
डूब जाना
सुख कामना हित
अतृप्ति के नये गर्त की जमीन
तलाशते व्यतीत होता
मेरा मूढ जीवन ।
छगन लाल गर्ग ।