Sunday, May 15, 2016

कारण ।

कब कारण बनूंगा
कि हुआ मुझसे
बहुत हताश हूँ इन अज्ञात अंधेरों से
प्रतिभा हुई हताहत
बेशर्मी की सियासत से
ओर अधकचरे विख्यातों बीच
पीसता जाता रात दिन
शायद अति का प्रचंड अंधड
आना चाहता
ओर तय यह कि जुगनू रश्मि भौथरा कर
तोड देगी दम
तब कही निर्मल आकाश मिले
ओर बन सके हम
कारण अपने कर्मो के
ओर पावन राहें सभी के लिए
दे सके उजालों का सच
होगा ऐसा संभव बहुत भरोसा
श्वास अभी बाकी हैं ।
छगन लाल गर्ग ।