ओर हम हैं पारखी
पुछते नही ओर कुछ
शिवाय जाति
सब आ जाता समझ
बिना जान पहचान समूचा इतिहास
उसके जीवन का
काबलियत तत्काल हो जाती प्रकटछ
हमारे हृदय मस्तिष्क मे
उस कुजात की
मानवता के नाम पर कुछ उकेरने की
नही जरूरत ओर न ही
तुम्हारी व्याख्या करने की जरूरत
हो जाता स्पष्ट स्वतः
तुम्हारा चरित्र तुम्हारा भविष्य
तुलना योग्य नही हो सकते तुम
शास्त्रीय मत ओर तुम्हारा होना
तुम गंदगी जिवंत बनी साक्षी
होने जाता अटल विश्वास
कि तुम केवल बने
मनुष्य देह के मात्र दास
यही तुम्हारा वर्तमान
ओर इसी परंपरा के अवशेष बन
ओकात मे रहो
अच्छा होगा हम सभी का इसी मे
अन्य व्यवस्थाऐ
ज्वालामुखी सी जला ना डाले तुम्हे
सोचना तुम्हारा अपना
ज्यादा कहना कही आफत ना बने
तुम्हारे लिए चलो इतने से समझो तो ।
छगन लाल गर्ग ।
पुछते नही ओर कुछ
शिवाय जाति
सब आ जाता समझ
बिना जान पहचान समूचा इतिहास
उसके जीवन का
काबलियत तत्काल हो जाती प्रकटछ
हमारे हृदय मस्तिष्क मे
उस कुजात की
मानवता के नाम पर कुछ उकेरने की
नही जरूरत ओर न ही
तुम्हारी व्याख्या करने की जरूरत
हो जाता स्पष्ट स्वतः
तुम्हारा चरित्र तुम्हारा भविष्य
तुलना योग्य नही हो सकते तुम
शास्त्रीय मत ओर तुम्हारा होना
तुम गंदगी जिवंत बनी साक्षी
होने जाता अटल विश्वास
कि तुम केवल बने
मनुष्य देह के मात्र दास
यही तुम्हारा वर्तमान
ओर इसी परंपरा के अवशेष बन
ओकात मे रहो
अच्छा होगा हम सभी का इसी मे
अन्य व्यवस्थाऐ
ज्वालामुखी सी जला ना डाले तुम्हे
सोचना तुम्हारा अपना
ज्यादा कहना कही आफत ना बने
तुम्हारे लिए चलो इतने से समझो तो ।
छगन लाल गर्ग ।