खुद दर्द सहे रक्षा की प्रतिदिन
अवसर रे सेवा कर उम्र नित दिन ।
भाव तेरे ढूँढ रे मानव
क्यों बिगाडे तू तेरा भव
मानव जन्म हैं लाजवाब
बना रे तू नित अभिनव।
बार बार करुणा की रश्मियों से
माता तेरा अनुराग बहा हृदय से
सिचा जीवन भरा हैं पर दया से
मोल करे पुत्र किस मापदंड से।
कहां से लाऊं बदला माँ ममता का
यहां कोई तुमसा नहीं समता का
ममता तेरी जग भोगे सुख जग का
वरना रह जाता सुखा तल जमीं का।
भाग्य मेरा तेरे गुण गाता
तू संसार का पावन नाता
फिका सारा मोह नहीं भाता
झूठ फरेब का दूसरा नाता।
हे माँ एक ही आँसू तेरा
हृदय तल मे झंझा घेरा
धिक् रे पुत्र जीवन तेरा
आया क्यों व्यर्थ रे फेरा।
सुनो सच क्या कह सकूंगा
रूको आहट हैं क्यों कहूँगा
भूलो भार झेलो तो सहूंगा
भुगतो पीड़ा दी वहीं रखूंगा।
जाओगे कहां किया तो साथ आयेगा
भागोगे किससे भाग्य तो साथ रहेगा
लाओगे कहां से दिया तो नहीं छोडेगा
जुडोगे किससे स्वार्थ तो नही छोड़ेगा ।
दर्द से बिलखते अनाथ से हमदर्दी रखते हो
दूर से देख अफसोस खूब परायो से करते हो
मदद चंदे के नाम पर रकम इक्कट्टी करते हो
सच तो यह हैं परोपकारी होकर चंदा ऐंठते हो।
खिलाओगे भूखो को तुम तो खुद खाने वाले हो
परायो का उपकार करोगे तुम तो स्वार्थी हो
उपचार करते तो हो जो रोगी यदि गरीब हो
दानदाता तो हो देते तभी न जब गुण गाता हो।
भरके कटोरे से द्वार भीखारी भीख देते हो
दुआँ सुने बिना द्वार कहां छोड घर मे आते हो
दिये का वसूले बिना आत्मा संतोष नहीं पाते हो
अवसर देने का मिला ईश्वर का धन्यवाद करते हो।
जगत ससीम जन विस्तृत असीम हैं
जीवन ससीम मन विस्तृत असीम हैं
शरीर सामर्थ्य ससीम कर्म असीम हैं
भंवर जाल फंसे चित सुख राह नहीं हैं ।
जाने वाले रूके सुना नहीं
पाने वाले भरे हो सुना नहीं
रोने वाले हंसे हो सुना नहीं
हंसने वाले रोये नही सुना नहीं ।