नहीं यहाँ हैं धोखा भारी दुखी हृदय बचना चाहे
ख्याली चित हारा माया से कपटी रूप नही मौहे।
आपदा नयी संघर्ष नया जूझते रहना जीवन हैं
कामना आती भाव उमडते बहता घना निर्झर हैं
काम नहीं आती बहती धारा नाव उपाय तरना हैं
समझ अकेली सक्षम हैं तो आपदा रास्ते देती हैं ।
जिन्दगी उदासियों का घरौदा बन रह गयी हैं
घनी पीड़ा साम्राज्य दिल मे जमाये जा रही हैं
हर्ष कतरा कहां हैं खोज जीवन भार हो गयी हैं
अचूक काल अपना विस्तार करता जा रहा हैं ।
कौन हैं समर्थ विषम गुम्फन से छुटकारा देते
लोग हैं मुझे बेहाल देखें पास से भी दूर जाते
बोल भी संवेदना के अपनों सेभी नहीं मिलते
तौल नेह तू प्रेमियों का सुख से गले मिलते ।
वितृष्णा हो गयी हैं कहानी कहीं नहीं जाती
हृदय रस रहा नहीं अब सुंदरता नहीं भाती
कुरूपता डराती रूप भयंकर बनाती जाती
जिन्दगी ठगनी बनी असली शक्ल बता जाती।
हाय रे इस उपहार का अंजाम आँखों आ गया
मोहित रस मन का भाव क्यों रहा समझा गया
कर्म कारण अर्थ संग्रह जाल नये घिरता गया
आज मिले अफसोस होता दर्द लिपटे उम्र जीया।
मस्ती भरे मदहोश अतीत अब कहां हैं तू कैसा था
जबरदस्त नशीले यौवनकाल उन्माद तेरा कैसा था
स्नेहिल मीठे रसभरे स्वरों कहां खोये तुम्हें सुना था
इठलाई सी कमनीय चितवन मैं घायल हुआ तुम्हीं से था।
यादों के तार सूक्ष्म अमूर्त रहते कहां नहीं जान पाता
मिल पाते अगर तो हृदय कुछ विनय याचना करता
दर्द दरिया द्रवित हुआ बहे दारूण हृदय जरूर होता
मोह अंधकार मिटता शास्वत सत्य का दीदार होता।
फफक उठा उफान पाकर मेरा विरान जीवन
ललक लंबित जिन्दगी की हो उठ हैं उत्पन्न
बहकने लगी स्वर धार मे खुशियों की कंपन
धडकने बेताल फिर भी गा रही हैं गीत मोहन।
बात कहते हो मैं सुनूं कैसे राग सुन पाता नहीं
घात प्रतिघात सहते मैं हो गया सुनसान नहीं
रात काली हैं आँख का उजास काम आता नहीं
मात खायी जिन्दगी हैं प्रभात का सा जौश नहीं ।
आ गये हो तुम अचानक घनी वेदना केगेह मे
जा नहीं पाओगे तुम अब सुख डूबे संसार मे
आते ही घेर लेता घना जाल होता कालिमा मे
भाते रहे तुम वेदना को तभी बुलायापास मे।
बहुत बार निष्ठा भाव सफलता का संघर्ष लडा हूँ
अनिष्ठा की भीड़ से धक्के खाया उठ नहीं पाता हूँ
जैसे ही उठने को होता कड़ी ठौकर पाया गिरता हूँ
लगता हैं उठे वहीं हैं जिनकी ठोकर से मैं गिरा हूँ ।
अब तुम बस भी करो ओर कितना कहोगे
कहते रहोगे तुम तब भी क्या कोरे रहोगे
सुनते होते तो शायद कुछ बडो का मानोंगे
यदि हृदय बदलते आज मे कुछ बन जाओगे ।
आहत हुए दिल मे उल्लास मुश्किल हैं
घायल देह लिए संघर्ष काम मुश्किल हैं
उपचार करे ऐसा उपचारक मुश्किल हैं
अंत आहत मन का जीवन मुश्किल हैं ।
दाता देता उसे ही जो खाली होता हैं
भरा वहीं हैं जो कदम नहीं चलता हैं
न सुने न कहे इशारों से ही जीता हैं
तोल तू ही क्या तुझमे खालीपन हैं ।
हम कब कहते हैं कि तुम काबिल नहीं हो
तुम ही खुद की काबलियत के गुण गाते हो
वैसे गुण सुने नहीं कभी कैसे काबिल हो
आप से ज्यादा कोई नहीं जो काबिल हो।
रास्ते टेढे मेढे ही सही कदम बढाने होगे
धरातल बोध ही चाल को गति देते रहेंगे
जानते हो क्या होता हैं अनचाहे गर बढोगे
मंजिल तो मुश्किल हैं बेमौत ही राह मरोगे।
कठिन होता हैं जीने लायक होना
गुलशर्रे उड़ा कर पराये पर जीना
आसान होगा बेशर्मी को अपनाना
मुश्किल किसी से हालात बताना ।