कब तक सुनू
रूदन
नन्ही जान बेतहाशा
दर्द भरी चित्कार
आह घना करूण स्वर
कसौटने लगा चित
नही पाता क्या संबंध
आंतों से
सुलगने लगी अग्नि धधक
ओर जलती सिकुडती आंते
लहर बन विचरने लगी
समूचे तन
डेढ माह का शिशु
भावी रोगो की रोकथाम
के उपाय का प्रयोग बना
दिया गया टीका
अकुशल नर्स नोकरी पर
उठा रहा सवाल
पूरा दिन हुआ
आखिर शिशु
सामर्थ्य का परीक्षण
तमाशा अगढ हाथो
कही जिन्दगी का
यम ना बने
सोचना होगा
मानव कहलाने वाले
सेवाकर्मी चिकित्सा के
कथन केवल वही
बहुत बार का
अब हद होने लगी
नही रह सकता संयम
जिसे आभूषण समझ
करता हूँ अंगीकार
अब त्यागना होगा
कही जलन का धुँआ
विस्तार ना पाये
सोचना होगा हमें ।
छगन लाल गर्ग ।
रूदन
नन्ही जान बेतहाशा
दर्द भरी चित्कार
आह घना करूण स्वर
कसौटने लगा चित
नही पाता क्या संबंध
आंतों से
सुलगने लगी अग्नि धधक
ओर जलती सिकुडती आंते
लहर बन विचरने लगी
समूचे तन
डेढ माह का शिशु
भावी रोगो की रोकथाम
के उपाय का प्रयोग बना
दिया गया टीका
अकुशल नर्स नोकरी पर
उठा रहा सवाल
पूरा दिन हुआ
आखिर शिशु
सामर्थ्य का परीक्षण
तमाशा अगढ हाथो
कही जिन्दगी का
यम ना बने
सोचना होगा
मानव कहलाने वाले
सेवाकर्मी चिकित्सा के
कथन केवल वही
बहुत बार का
अब हद होने लगी
नही रह सकता संयम
जिसे आभूषण समझ
करता हूँ अंगीकार
अब त्यागना होगा
कही जलन का धुँआ
विस्तार ना पाये
सोचना होगा हमें ।
छगन लाल गर्ग ।