प्रवाहित विद्युत अदृश्य
दृश्य होते तार
स्पर्श करते इमारतों से
संचारित ऊर्जा प्रवाह उपकरणों से
होता रहता उपयोगी
अन्यथा यह प्रवाहित ऊर्जा
देती हैं मौत
उजाड देती बस्तियाँ संसर्ग होने पर
बड़ी घातक नियति
ठीक इसी राह हमे देती छूट
जीने की कि संभले रहे
ऊर्जा की चौंट से
ठीक यही दशा हमारी
भीतर की अदृश्य ऊर्जा
दे सही राह
कि हो पाये निर्माण
स्वयं का ओरो के साथ
संसर्ग बनें हमारा विद्युत सा
पर ना दे सके
मौत किसी को
बनने मे तत्परता दिखाये मानव
सहृदय संवेदनशील जीये केवल
असलियत मानवता निमित्त
ना कि मौत के लटकते स्पर्श करते
बिजली के तार बनकर
जिनका लक्ष्य मात्र
इमारतों मिस मानवता को
मिटाना
ओर दिखते रहे जन कल्याण तत्पर।
छगन लाल गर्ग ।