वठीक कहा कि चले तुम
जीवन के धरातल पर
ओर बहुत कुछ पाया रास्तों से
जब कि यह पाया रास्ते मे ही रहा
नहीं चल पाया संग संग
ओर फिर भी अच्छा लगता
जब बताते अपनी सामर्थ्य
ओर कहते अनुभव का यथार्थ
कि सरित गहृर खाई की बाधा
कैसे हटाकर किया नव निर्माण
नव राहों का
चलो ठीक मान लेते शब्दसः जो कहते
पर तुम्हारा नूर नहीं कहता
तुम्हारी विजय गाथा शब्दों के संग
नापी जमीन का सच थोड़ा कहोंगे
कितनी बार गिरना उठना रहा
जरा जिक्र करना सच्चाई का कि लगे
तुम काबिल भी हो अनंत की उड़ान के
नहीं भाता रंग भरा जज्बाती कथन
असली आसमानी उड़ान का
बुरा ना मानना सच तो यह
तनिक सा भी अनुभव संसार जीने का
अनुभव बन जाता रास्ता
आसमानी उड़ान का ।
छगन लाल गर्ग ।
जीवन के धरातल पर
ओर बहुत कुछ पाया रास्तों से
जब कि यह पाया रास्ते मे ही रहा
नहीं चल पाया संग संग
ओर फिर भी अच्छा लगता
जब बताते अपनी सामर्थ्य
ओर कहते अनुभव का यथार्थ
कि सरित गहृर खाई की बाधा
कैसे हटाकर किया नव निर्माण
नव राहों का
चलो ठीक मान लेते शब्दसः जो कहते
पर तुम्हारा नूर नहीं कहता
तुम्हारी विजय गाथा शब्दों के संग
नापी जमीन का सच थोड़ा कहोंगे
कितनी बार गिरना उठना रहा
जरा जिक्र करना सच्चाई का कि लगे
तुम काबिल भी हो अनंत की उड़ान के
नहीं भाता रंग भरा जज्बाती कथन
असली आसमानी उड़ान का
बुरा ना मानना सच तो यह
तनिक सा भी अनुभव संसार जीने का
अनुभव बन जाता रास्ता
आसमानी उड़ान का ।
छगन लाल गर्ग ।