Thursday, February 25, 2016

बहती धारा ।

नही अहसास होती
व्यक्ति की अधिक प्रबुद्धता
अब वह चिंतन मुक्त हुआ
या चिंतनशील
एक प्रवाह शक्तिशाली मौड देता
विद्धान की विद्धवता
चिंतन का मौलिक हक
जरूरी हो जाता जिन्दगी के लिए
स्वाभाविक जीवन के लिए
शक्तिशाली प्रवाह में
तिनके की तरह बहना
सागर विलय का असार समझ
बहती धारा में
विलय का दर्द सहीद होने की
संभव है  अमरता दे जाय
यदि धारा गति का अंदाज
चिंतन का दायरा
जीवन मे भर दे
अमरत्व कही ओर नही
शक्तिशाली धारा का मनोविज्ञान
समझ अभिव्यक्ति देना ही
जीवित  अमरत्व है ।
छगनलाल गर्ग ।