Tuesday, February 23, 2016

प्रयोजन ।

हर कार्य अपने कारण से
होता जाता सक्रिय
इसलिए कि
वह मकसद  पूर्णता ले सके
असत्य सत्य से नहीं होता
सक्रियता का संबंध
उसे मात्र चाहिए
अपना निष्कर्ष
कारण का प्रयोजन मात्र
संलग्न रहता
हर क्रियाओं मे
ओर प्राप्ति की हर राह
असत्य से भरी
नहीं हैं खतरा असत्य का
खतरा रहता
प्रयोजन प्राप्ति मे सत्य का
हर सत्य
मन वांछित प्रयोजन प्राप्ति मे
बनता हैं रुकावट
क्यों कि सत्य होता
निश्छल ओर स्वार्थ रहित
जबकि मानव प्रयोजन
केवल कामनाओ का
लंबा जाल
जिसमें लालसाओ का मोह
अनेको सच्चे प्रयोजन
असत्य की बलि चढ़ते
निरंतर
सत्य निखरे हो मानव के प्रयोजन ।
छगन लाल गर्ग ।