हृदय तू क्या होगा
नित्य पावन
या होता रहता तेरा भी
रूपांतरण
अपनत्व का अंकुर उपजता
तेरे ही भीतर
ओर तब नही करता भरोसा
तेरा कि तू रहेगा निष्पक्ष
नही करता यह
आरोपण
एक व्यवहारिक स्वाभाविक सच
तेरी दुर्बलता का
तेरे अंधकार का
हो जाते तुम तनाव मय
शांत या विश्रांति दशा मात्र
निष्पक्षता से आती
करनी होगी मेरे हृदय अब
क्रांति सच्चाई की
अपने पराये को छोड सत्य की
क्रांति अंकुर लेती है हृदय से
सच्चा क्रांति कारी होता है हृदय
स्थित रहता वह स्व मे
रूपांतरण चाहने वाले भी
आते पास तुम्हारे
ओर यही से रूपांतरित होता
नया युग
नयी जमीन चेतना की ।
छगनलाल गर्ग ।
नित्य पावन
या होता रहता तेरा भी
रूपांतरण
अपनत्व का अंकुर उपजता
तेरे ही भीतर
ओर तब नही करता भरोसा
तेरा कि तू रहेगा निष्पक्ष
नही करता यह
आरोपण
एक व्यवहारिक स्वाभाविक सच
तेरी दुर्बलता का
तेरे अंधकार का
हो जाते तुम तनाव मय
शांत या विश्रांति दशा मात्र
निष्पक्षता से आती
करनी होगी मेरे हृदय अब
क्रांति सच्चाई की
अपने पराये को छोड सत्य की
क्रांति अंकुर लेती है हृदय से
सच्चा क्रांति कारी होता है हृदय
स्थित रहता वह स्व मे
रूपांतरण चाहने वाले भी
आते पास तुम्हारे
ओर यही से रूपांतरित होता
नया युग
नयी जमीन चेतना की ।
छगनलाल गर्ग ।