विभोर होता हूँ मैं
जब सुनता
तुम आने वाले हो
खिल उठता मन विगत की स्मृति से
हर पल हो उठता जीवंत
तुम्हारे न होते भी
भावनाओं घेर लेती मुझे
बाढ़ बनकर
आह जीवन का असलीपन केवल तुम
तुम्हारा संसर्ग मात्र
कितना मादक कितना मदहोश करता
हमारा सामिप्य
अब आ ही रहे हो तो
सजा लूं थोड़ा मन मेरा
कर लूं आत्मसात जीवन का अकेलापन
देखो यह आना जाना
जीवन का शाश्वत सत्य
पहचान कर तो लूं अपनी
कि यह मिलना देता सामिप्य का सुख
जिसमें सत्य आधा अधूरा
कच्चापन भावनाओ का मात्र
राग हृदय तंत्री के एकमेव हो सके
यह करो कुछ मेरे मित
कि तन सामिप्य से ज्यादा
मन का तारतम्य न टूटे
जन्म जन्मो तक
करो ना कच्चे जीवन का कुछ
पक्का बन्धोवस्त
क्या अबकी बार
मेरी भाॅति करोगे ना तैयारी
मना मत करना
तुम्हारा आगमन इस बार
पुर्नरागमन ना हो
यह क्या बार बार का अलगाव
एकत्व प्रेम का विरोधी ना बन जाय
समझते हो ना मितवा मेरे ।
छगन लाल गर्ग।
जब सुनता
तुम आने वाले हो
खिल उठता मन विगत की स्मृति से
हर पल हो उठता जीवंत
तुम्हारे न होते भी
भावनाओं घेर लेती मुझे
बाढ़ बनकर
आह जीवन का असलीपन केवल तुम
तुम्हारा संसर्ग मात्र
कितना मादक कितना मदहोश करता
हमारा सामिप्य
अब आ ही रहे हो तो
सजा लूं थोड़ा मन मेरा
कर लूं आत्मसात जीवन का अकेलापन
देखो यह आना जाना
जीवन का शाश्वत सत्य
पहचान कर तो लूं अपनी
कि यह मिलना देता सामिप्य का सुख
जिसमें सत्य आधा अधूरा
कच्चापन भावनाओ का मात्र
राग हृदय तंत्री के एकमेव हो सके
यह करो कुछ मेरे मित
कि तन सामिप्य से ज्यादा
मन का तारतम्य न टूटे
जन्म जन्मो तक
करो ना कच्चे जीवन का कुछ
पक्का बन्धोवस्त
क्या अबकी बार
मेरी भाॅति करोगे ना तैयारी
मना मत करना
तुम्हारा आगमन इस बार
पुर्नरागमन ना हो
यह क्या बार बार का अलगाव
एकत्व प्रेम का विरोधी ना बन जाय
समझते हो ना मितवा मेरे ।
छगन लाल गर्ग।