बहुत दूर निकल आया
अपनत्व की दुनिया से
नहीं देते बोध
आत्मीय संबंध जिसमें रहा घीरा
जीवन पर्यन्त
अर्पित किये जीवन के बहुमूल्य क्षण
भावनामय कर्ममय
हर क्षण ताप की ज्वलन झेलता
कारण लिऐ
कि अपनों को अर्पित कर सकूँ
खुशहाली भरा जीवन
ओर आज बहुत व्यतीत हो चुका
अपनो को पूर्ण करने मे
नहीं बचा पाया अस्मिता अपनी
पूर्णता पाये अपनो की कृपा से
टूटा पहिया बना
वक्त का
बहुत दूर आ गिरा हूँ
बेकाम अर्थ हीन
रंगीनियो की परसाईया भी
नहीं पहुँच पाती
यहाँ तक
लगता जाता विलिन होता अस्तित्व
बेसार मिटता सा
अब हो चूका
अनंत फासला
अपनो बीच
नापा नहीं जा सकता
हाँ महसूस करवाते
पास आते
आत्मीयता प्रदर्शन भी होता
पर वे केवल शरीर हैं
ओर शरीर बने आऐ
जितने पास आने का
करते हैं दावा
आत्मा से बढ़ता जाता
गहरा अंतराल
अनंत फासला ।
छगन लाल गर्ग।
अपनत्व की दुनिया से
नहीं देते बोध
आत्मीय संबंध जिसमें रहा घीरा
जीवन पर्यन्त
अर्पित किये जीवन के बहुमूल्य क्षण
भावनामय कर्ममय
हर क्षण ताप की ज्वलन झेलता
कारण लिऐ
कि अपनों को अर्पित कर सकूँ
खुशहाली भरा जीवन
ओर आज बहुत व्यतीत हो चुका
अपनो को पूर्ण करने मे
नहीं बचा पाया अस्मिता अपनी
पूर्णता पाये अपनो की कृपा से
टूटा पहिया बना
वक्त का
बहुत दूर आ गिरा हूँ
बेकाम अर्थ हीन
रंगीनियो की परसाईया भी
नहीं पहुँच पाती
यहाँ तक
लगता जाता विलिन होता अस्तित्व
बेसार मिटता सा
अब हो चूका
अनंत फासला
अपनो बीच
नापा नहीं जा सकता
हाँ महसूस करवाते
पास आते
आत्मीयता प्रदर्शन भी होता
पर वे केवल शरीर हैं
ओर शरीर बने आऐ
जितने पास आने का
करते हैं दावा
आत्मा से बढ़ता जाता
गहरा अंतराल
अनंत फासला ।
छगन लाल गर्ग।