Friday, February 12, 2016

संबंधित नहीं क्षमता ।

मिथ्या का सत्य
प्रगाढ़ आत्मसात किये
व्यतीत करता हर क्षण अमूल्य
जीवन के
ज्ञान विज्ञान के शास्त्रो को समझा परखा
मान लिया जीवन
ओर अंगीकृत किये जीता हूँ
जिन्दगी तुझे
जबकि नहीं हैं अनिवार्य संबंध
जीवन की सच्चाईयो से
धन ज्ञान यौवन पद
अवस्था के पल
आये कि गये
दी प्रसन्नता भी संग आई गई
क्षमता भी समय से आबद्ध
ओर यह गरूर
एक बार का प्रवेश उसका
जाने पर भी भ्रमित करता
मिथ्या मोह मे
गुजारने को विवश होता जीवन
नहीं सत्य आया गया नहीं
स्थित प्रज्ञा हैं
अलाप क्षमता का
रूग्ण जीवन का संकेत हैं ।
छगन लाल गर्ग ।