परमेश्वर मेरे
तेरे हर मंदिर आया
अनंत
अभिलाषा के साथ
सुना था तू हर लेता
हर कष्ट
सुनाने से तुझे
मिल जाती
संतुष्टि विश्वास भरी
ओर
अचानक ही कृपा सागर
अदृश्य दया का सागर
देता करुणा की लहर
जीवन छा जाती
सुख की छाया
ओर यही पूर्वाग्रह लिए
हर बार आया हूँ
तेरे द्वार
अकारण नहीं
कारणों की
लंबी सूची के साथ
एक एक बांचा हैं प्रभु
हर बार जब भी आया
नहीं मिटी
आज तक चाह
बढ़ती जिन्दगी के साथ
तृष्णायें भी लेती हैं उम्र
सच कहूँ मेरे परमेश्वर
थक चूका अब
तृष्णाओं का पिटारा
मंदिर लाते लाते
आज आया हूँ खाली
भारहीन अकारण
सहज आनंद की
भावना से
कुछ अनुभूत कहने
कुछ मांगने नहीं
केवल धन्यवाद निमित्त
केवल प्रार्थना के
भार को लिए
केवल प्रेम लिए
कि बहुत दिया तूने मुझे
मेरी पात्रता से अधिक
बहुत ज्यादा
आज अनुभूति से भरा भरा
लगता हैं पहली बार
कि पनपता निर्मल हुआ जाता
प्रेम मेरा परमेश्वर ।
छगन लाल गर्ग ।
तेरे हर मंदिर आया
अनंत
अभिलाषा के साथ
सुना था तू हर लेता
हर कष्ट
सुनाने से तुझे
मिल जाती
संतुष्टि विश्वास भरी
ओर
अचानक ही कृपा सागर
अदृश्य दया का सागर
देता करुणा की लहर
जीवन छा जाती
सुख की छाया
ओर यही पूर्वाग्रह लिए
हर बार आया हूँ
तेरे द्वार
अकारण नहीं
कारणों की
लंबी सूची के साथ
एक एक बांचा हैं प्रभु
हर बार जब भी आया
नहीं मिटी
आज तक चाह
बढ़ती जिन्दगी के साथ
तृष्णायें भी लेती हैं उम्र
सच कहूँ मेरे परमेश्वर
थक चूका अब
तृष्णाओं का पिटारा
मंदिर लाते लाते
आज आया हूँ खाली
भारहीन अकारण
सहज आनंद की
भावना से
कुछ अनुभूत कहने
कुछ मांगने नहीं
केवल धन्यवाद निमित्त
केवल प्रार्थना के
भार को लिए
केवल प्रेम लिए
कि बहुत दिया तूने मुझे
मेरी पात्रता से अधिक
बहुत ज्यादा
आज अनुभूति से भरा भरा
लगता हैं पहली बार
कि पनपता निर्मल हुआ जाता
प्रेम मेरा परमेश्वर ।
छगन लाल गर्ग ।