हाँ करता हूँ निरंतर
प्रतिक्षा
अब तक नही हुआ स्पष्ट
पता नही किसकी
हैं प्रतिक्षा
लगता कोई होगा परिवर्तन
व्यवस्था में
ओर खुशहाल होगी जिन्दगी
मेरी भी तुम्हारी भी
आज तक
निराश भी नाराज भी
सोचता हूँ सब बेकार हैं
छोडो आशा
पर आशा छोडे भी
होगा क्या
जो होना था हो गया अब
ओर भी निरंतर
कृत्य घट रहे हैं
पता नही किसके निमित
हल्का सा भी आभास
नही पाया
कि कुछ भला होगा
पीसते जाते दुचक्रो के जाल
आम लोगो का
तुम कहते रहो
अच्छे दिनो का
ओर हम बिना जवाब मांगने का
हक छोड चूके
अब ओर करना भाग्य मे
हम निराधार नागरिको का
संवेदना हक है करते रहना
प्रतिक्षा ।
छगनलाल गर्ग ।
प्रतिक्षा
अब तक नही हुआ स्पष्ट
पता नही किसकी
हैं प्रतिक्षा
लगता कोई होगा परिवर्तन
व्यवस्था में
ओर खुशहाल होगी जिन्दगी
मेरी भी तुम्हारी भी
आज तक
निराश भी नाराज भी
सोचता हूँ सब बेकार हैं
छोडो आशा
पर आशा छोडे भी
होगा क्या
जो होना था हो गया अब
ओर भी निरंतर
कृत्य घट रहे हैं
पता नही किसके निमित
हल्का सा भी आभास
नही पाया
कि कुछ भला होगा
पीसते जाते दुचक्रो के जाल
आम लोगो का
तुम कहते रहो
अच्छे दिनो का
ओर हम बिना जवाब मांगने का
हक छोड चूके
अब ओर करना भाग्य मे
हम निराधार नागरिको का
संवेदना हक है करते रहना
प्रतिक्षा ।
छगनलाल गर्ग ।