अच्छा ही रहा
पाला भ्रम तो टूटा
जोडता रहा नित्य
नये सपने
शुरूआती दौर ही
कच्चापन लिए सत्य उकेरते
बिम्ब स्केच किये
तूलिका से निर्मित
रंग देना चाहता
मनभाते जीवन से निकले
तैयार था मैं
पक्का करू जीवंतता ले
कि भीतर का
जंजाल शब्दों घीरा
तुनक मिजाजी जज्बा
करता जाता सत्य का भी
अतिक्रमण तूलिका का
सौम्य तूली
अतिक्रमण की कर्कशता से
हार जाती
ओर असली चित्र
आज भी नहीं पा सका
अपना असली अस्तित्व
करता हूँ प्रयास
यथार्थ उतरे केनवास पर
हो जाता हर प्रयास
असफल मेरा
नौक घीसी तूलिका
अब रोकता हूँ
अहंकार का अति
बिम्ब उभरना चाहता
मेरी तूलिका बार बार
बना भी तो
धोखा होगा
निश्छलता के साथ निर्अहंकार के साथ
अब हर कौशिश मेरी नहीं
सौम्यता की भी नहीं
अहंकार की होगी
यह बेमानी होगा
अब तक का सृजन
असलियत की शक्ल हैं
रहने दो उसे
बाहरी चमक खोने से
अधिक महत्वपूर्ण हैं
भीतर सत्य ना ढक जाऐ ।
छगन लाल गर्ग।
पाला भ्रम तो टूटा
जोडता रहा नित्य
नये सपने
शुरूआती दौर ही
कच्चापन लिए सत्य उकेरते
बिम्ब स्केच किये
तूलिका से निर्मित
रंग देना चाहता
मनभाते जीवन से निकले
तैयार था मैं
पक्का करू जीवंतता ले
कि भीतर का
जंजाल शब्दों घीरा
तुनक मिजाजी जज्बा
करता जाता सत्य का भी
अतिक्रमण तूलिका का
सौम्य तूली
अतिक्रमण की कर्कशता से
हार जाती
ओर असली चित्र
आज भी नहीं पा सका
अपना असली अस्तित्व
करता हूँ प्रयास
यथार्थ उतरे केनवास पर
हो जाता हर प्रयास
असफल मेरा
नौक घीसी तूलिका
अब रोकता हूँ
अहंकार का अति
बिम्ब उभरना चाहता
मेरी तूलिका बार बार
बना भी तो
धोखा होगा
निश्छलता के साथ निर्अहंकार के साथ
अब हर कौशिश मेरी नहीं
सौम्यता की भी नहीं
अहंकार की होगी
यह बेमानी होगा
अब तक का सृजन
असलियत की शक्ल हैं
रहने दो उसे
बाहरी चमक खोने से
अधिक महत्वपूर्ण हैं
भीतर सत्य ना ढक जाऐ ।
छगन लाल गर्ग।