चर्मकार खाल उतारता
मरे हुए पशुओं की
जान लेवा दुर्गंध से भरता जाता
श्वास जिन्दगी की
रात दिन वही रहता
हिफाजत करता
कुत्तों जंगली जानवरों से
उसी के बच्चे
पढते अभावों मे सरकारी स्कूल
विभिन्न घृणित उपेक्षाओ में
हर ओर से झेलते
नफरत के तीर
स्वर्णों की हंसी ठिठोली बीच
होती पढाई इनकी
ऐसे माहौल में भी
मुकाबले में आने लगे कथित
गंदे लोग
ओर देने लगे टक्कर
प्राइवेट स्कूल में पढते स्वर्ण रईस को
संविधान के तहत
उनकी हक का अनुपात
नौकरी धंधे में
मिलता भी है तो नही मेहरबानी
किसी के हिस्से की
उनका हक उन्हे मिले
यही नियत व साम्यता
मानवाधिकार की
सही प्रजातंत्र हम जीते है
हमे गर्व कि हम हिन्दूस्तानी है
अपरिपक्वता की
इर्ष्या घृणित तुम्हारी ।
छगनलाल गर्ग ।
मरे हुए पशुओं की
जान लेवा दुर्गंध से भरता जाता
श्वास जिन्दगी की
रात दिन वही रहता
हिफाजत करता
कुत्तों जंगली जानवरों से
उसी के बच्चे
पढते अभावों मे सरकारी स्कूल
विभिन्न घृणित उपेक्षाओ में
हर ओर से झेलते
नफरत के तीर
स्वर्णों की हंसी ठिठोली बीच
होती पढाई इनकी
ऐसे माहौल में भी
मुकाबले में आने लगे कथित
गंदे लोग
ओर देने लगे टक्कर
प्राइवेट स्कूल में पढते स्वर्ण रईस को
संविधान के तहत
उनकी हक का अनुपात
नौकरी धंधे में
मिलता भी है तो नही मेहरबानी
किसी के हिस्से की
उनका हक उन्हे मिले
यही नियत व साम्यता
मानवाधिकार की
सही प्रजातंत्र हम जीते है
हमे गर्व कि हम हिन्दूस्तानी है
अपरिपक्वता की
इर्ष्या घृणित तुम्हारी ।
छगनलाल गर्ग ।