Wednesday, February 3, 2016

अच्छा हो।

आज की शिक्षा
करती नित्य प्रगति
विस्तार मात्र बेरोजगारी का
कि विराट होता जाता
प्रतिस्पर्धा का तूफान
नहीं संभले संभलता
नीति धारको से
अब यह समस्या नहीं
उभरा बन चूका रावणाकार
जहां मानवता मरती जाती
हर दिन
प्रतिस्पर्धा का रण
पहुँच चुका नये आयाम
अब नहीं रहा आसान
सामान्य जन का शिक्षित होना भी
ओर यदि पढ़ें भी तो
रोजगार नहीं आसान
राहे अति हूई कठोर
नही रहा आसान
शिक्षा ओल विचार
नहीं पाते प्रतिफलन का आकार
शास्वत प्रतिभा घीर चूकी
रंगीन तेजी से बरसते
कीमती कागज के टुकड़ों
भरे गूम्फन मे
अब नही मिलते
ज्ञान व प्रतिभा के पुजारी
अब सब गुण छीपे
सफेद कपडो की चालाकी मे
ओर प्रजातंत्र के विद्वान
लरजते हाथों
युवाओं के लिए
माँगते दुऑओ की भीख
सब्रधारी शिक्षित युवा
थके हारे मौन मूक
उबलती हसरतो के साथ
माँगता हैं हिस्सा
जिन्दगी जीने का
ओर समर्थ निर्णायक
आगे बढकर
अदा दिखाते पहेलु दर पहेलु बदलते
संलग्न हैं
घोषणाओ का पिटारा लिए
भ्रमित करते सीमाओं को
निर्धारित समय की
अच्छा हो
दोनों निकले देखे सत्य
सीधा रास्ता
समय के धारे पर चलता
कोई रास्ता तो
खोलना ही होगा
समय रहते ।
छगन लाल गर्ग।