मत रोको मुझे
कहने दो यह भीतरी राग
आने दो बाहर
बन जाने दो शब्द
चेतनमय प्राणों के नाद
समझ लोगें
सच समाया अंतरतम का
लेने दो इसको स्वर आकार
ठीक रहेगा
सचेत हुए राग स्वर चेतन मे समाये
संगीत मय समा बने
राग लय का विपुल उठाव
झंकृत हुआ
करता जाता अपना विस्तार
स्थूल बना
पहचान देता अति सूक्ष्म की
जहाँ राग तंत्री जुडती जाती
हृदय तंत्री से
सुनते हो अबोध राग
अलौकिक
यही देगा पहचान तुम्हारी
चेतन बन
अचेतन यात्रा की
मेरे चित करो ना
अपना अर्पण
जिसे कह सको अपना
अवसर दुर्लभ पाया
करो ना हृदय
अपने भीतरी स्वरों का
राग उद्गार ।
छगन लाल गर्ग ।
कहने दो यह भीतरी राग
आने दो बाहर
बन जाने दो शब्द
चेतनमय प्राणों के नाद
समझ लोगें
सच समाया अंतरतम का
लेने दो इसको स्वर आकार
ठीक रहेगा
सचेत हुए राग स्वर चेतन मे समाये
संगीत मय समा बने
राग लय का विपुल उठाव
झंकृत हुआ
करता जाता अपना विस्तार
स्थूल बना
पहचान देता अति सूक्ष्म की
जहाँ राग तंत्री जुडती जाती
हृदय तंत्री से
सुनते हो अबोध राग
अलौकिक
यही देगा पहचान तुम्हारी
चेतन बन
अचेतन यात्रा की
मेरे चित करो ना
अपना अर्पण
जिसे कह सको अपना
अवसर दुर्लभ पाया
करो ना हृदय
अपने भीतरी स्वरों का
राग उद्गार ।
छगन लाल गर्ग ।