Thursday, February 11, 2016

अस्मिता का प्रश्न ।

यह जीवन असमझस का प्रवाह
विचारों ओर क्रियाओं की विसंगतियों से घीरा
समन्वय की गुन्जाईश तले
अपनत्व का अपूर्ण संचय जीता
नहीं कामयाब
कि सत्य का आग्रह अपना कहता
साबित करे जीवन की अस्मिता
कि लो यह रहा सत्य जीवन
जीओ इसे
पाओ सार जिन्दगी
नहीं ऐसे
हर व्यक्ति कहता अपना सत्य
जीया उसने अनुभूति मे पाया
वहीं रहा सत्य उसका
उसकी अपनी अस्मिता
उसी सत्य का सार पाती
अपने जीवन
नहीं करता आग्रह मेरी अनुभूति का
कि तुम असत्य जीये
ओर मैं सत्य
नहीं होगा यह ठीक पहचान
जीवन की
हर व्यक्ति की जिन्दगी पाती
अपनी समझ
ओर जीवन का असली अर्थ
सत्य का सार
केवल अनाग्रह
सभी की अस्मिता मे समाया
असली जीवन
ढूँढना नित्य बाकी
जीवन रहता पर सत्य सार नहीं ।
छगन लाल गर्ग।