सखा मेरे आनंद दो
अपनी ही मरजी मत रहो
हृदय के किनारे
कगार बने मत रहो
बाहरी धुऑ कालिमा लिए
बढता भीतर
सखा मेरे रोको ना
करो ना तुम प्रवेश भीतर
ऑधी नहीं आनंद बनकर
ध्यान दो मेरी तरफ
थोड़ा सा ही
घूटता जाता दम धुएँ घीरा
सखा मेरे आनंद दो
अनुराग की माया भी
विरक्ति की छाया भी
महा आनंद का सागर भी
हिलोर विहीन
निश्चल चेतन मय हो
भूल भूलैया बनू अस्तित्व हीन
विसर जाय चेतन अहं भी
सखा मेरे
रसास्वादन दो।
छगन लाल गर्ग।
अपनी ही मरजी मत रहो
हृदय के किनारे
कगार बने मत रहो
बाहरी धुऑ कालिमा लिए
बढता भीतर
सखा मेरे रोको ना
करो ना तुम प्रवेश भीतर
ऑधी नहीं आनंद बनकर
ध्यान दो मेरी तरफ
थोड़ा सा ही
घूटता जाता दम धुएँ घीरा
सखा मेरे आनंद दो
अनुराग की माया भी
विरक्ति की छाया भी
महा आनंद का सागर भी
हिलोर विहीन
निश्चल चेतन मय हो
भूल भूलैया बनू अस्तित्व हीन
विसर जाय चेतन अहं भी
सखा मेरे
रसास्वादन दो।
छगन लाल गर्ग।