अब चिन्ता तो रहेगी ही
चमकदार परत हटने से
खूब हुआ तिलस्म
आकर्षित करता रहा दुनिया
आवरण की परत से
अब नहीं देती चमक
तो लगता सत्य
शायद धूधला गया
नहीं यह कैसे संभव
सत्य का अस्तित्व
घीसते घीसते परिपक्व बनता
अधिक उजास भरता जीवन
नहीं था सत्य यह
एक मुल्लमा परत चमक की
अधिक घीसते रहे
हुई फीकी
खो चुकी अपनी चमक
सामर्थ्य था उतनी दी चमक
अब नहीं रही चमक
नये मुल्लमो का बाजार
नित बढता
ऐसे मे हर समझदार
खरीद लाता बाजार से नित
नये चमकिले मुल्लमे
हर इन्सान दिखता मुल्लमा पहना
मुखोटो का यह सच
हो उठा आखिर सच
युग का
जहां असली चमक भी
ओर असली असलियत जीना
हो चुका जान लेवा
जब कभी भी चाहता
असलियत बताना
मुल्लमा ओर पकडता मुझे
जीने की गरज
ओर मैं
हताशा मे बेपरवाह हटाने लगा हूँ
अपना मुखौटा
ओर ऐसे मैं स्वयं खिचकता मेरा
छूटता मुल्लमा ।
छगन लाल गर्ग ।
चमकदार परत हटने से
खूब हुआ तिलस्म
आकर्षित करता रहा दुनिया
आवरण की परत से
अब नहीं देती चमक
तो लगता सत्य
शायद धूधला गया
नहीं यह कैसे संभव
सत्य का अस्तित्व
घीसते घीसते परिपक्व बनता
अधिक उजास भरता जीवन
नहीं था सत्य यह
एक मुल्लमा परत चमक की
अधिक घीसते रहे
हुई फीकी
खो चुकी अपनी चमक
सामर्थ्य था उतनी दी चमक
अब नहीं रही चमक
नये मुल्लमो का बाजार
नित बढता
ऐसे मे हर समझदार
खरीद लाता बाजार से नित
नये चमकिले मुल्लमे
हर इन्सान दिखता मुल्लमा पहना
मुखोटो का यह सच
हो उठा आखिर सच
युग का
जहां असली चमक भी
ओर असली असलियत जीना
हो चुका जान लेवा
जब कभी भी चाहता
असलियत बताना
मुल्लमा ओर पकडता मुझे
जीने की गरज
ओर मैं
हताशा मे बेपरवाह हटाने लगा हूँ
अपना मुखौटा
ओर ऐसे मैं स्वयं खिचकता मेरा
छूटता मुल्लमा ।
छगन लाल गर्ग ।