Tuesday, February 23, 2016

प्रार्थना ।

कल सवेरे स्वीकार हुई
प्रार्थना मेरी
साँई राम के मंदिर में
नहीं प्रवेश करता हर दिन
शुक्रवार को छोड़
कल स्थापना दिवस पर
मंदिर के
हुआ था प्रविष्ट मंदिर में
ओर रूंघे गले से
बस इतना सा
भीतर को सुनाते कहा
बड़ी कृपा की
मेरे सद् गुरू
तू आया तो सही इस जगह
इस रूप में
माथा बहुत झूका दिया मैंने
दर्द की चुभती सी लहर
पैर से सिर तक की ऊभरी को
बर्दाश्त कर
दोनों हाथो से दंडवत हुआ था मैं
ओर प्रतिनिधि पुजारी ने
स्वीकार की थी प्रार्थना
शायद पहुँची होगी सांई तुझ तक
आज फिर आ पहुँचा
हमेशा की तरह
कल वाला पुजारी आज फुरसत मे
बाहर ले रहा
चाय की चुस्सकियां
ओर नितांत अकेले में
आज अवसर पाया आया हूँ साक्षात्
प्रमु मेरे स्वीकार करो ना
सीधे ही
मेरे सुख दुख ओर संसार के सुख की प्रार्थना भी
सुनते हो ना
सस्वर कहता हूँ आज
एकान्त पाकर ।
छगन लाल गर्ग ।